होली

Saturday, March 16, 2019

होली का त्यौहार





                         होली का त्यौहार

होली


March 16, 2019
                            🎄 होली 🎄
हम होली का त्योहार तो मनाते हैं लेकिन होली क्यों बनाई जाती है यह भूल जाते हैं ! होली के दिन होलिका अपने भतीजे प्रह्लाद को आग में जलाने के लिए आग के अंदर बैठी थी लेकिन प्रह्लाद एक भक्ति था होलिका को भी एक वरदान था कि वह आग में नही जलेगी ! लेकिन उसने अपनी शक्ति का दुरुपयोग किया तो उसको मिला वरदान भंग हो गया होलिका तो जल गई लेकिन प्रहलाद को भगवान ने बचा लिया! आज हम सिर्फ यह दिखावा करते हैं होली जलाने का सिर्फ होली जलाने से कोई फायदा नहीं है यदि फायदा होगा तो तभी होगा जब मानव समाज प्रहलाद की तरह भगवान की भक्ति करे ! सिर्फ होलिका दहन से कुछ नहीं होगा यह सिर्फ एक दिखावा मात्र है !
 होली के दिन भगवान की भक्ति करनी चाहिए जिन्होंने होलिका तथा हिरणाकुश को मारकर अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा की थी! यदि हम भगवान की भक्ति नहीं करके अन्य कार्य जैसे चोरी ,जारी, रिश्वतखोरी ,लूट - कसोट करेंगे तो हमारा हाल भी होलिका की तरह ही होगा प्रह्लाद की तरह हमारी रक्षा नहीं हो पाएगी अतः हमें परमात्मा की भक्ति करनी चाहिए !!
भक्ति भी हमें उस परमात्मा की करनी चाहिए जो हमारे रक्षा कर सकें हमें सभी दुखों से दूर कर सके आखिर कौन है वह परमात्मा जो हमें सभी दुखों से दूर कर सकता है हमारे सभी पाप कर्मों का नाश करके हमें सत्यलोक ले जा सकता है उस परमात्मा का पता कैसे चलाएं इसके लिए हमारे सद ग्रंथ ही प्रमाण है की ऐसा सुखी देने वाला परमात्मा कौन है आज तक सभी बताते आए हैं कि  सबका मालिक एक है लेकिन कोई भी यह प्रमाणित नहीं कर पाया कि वह सबका मालिक एक है वह कौन है लेकिन संत रामपाल जी महाराज एकमात्र ऐसे संत हैं जिन्होंने यह प्रमाणित कर दिया कि  कबीर परमेश्वर ही सब के मालिक हैं बताओ वही पूर्ण परमात्मा है  संत रामपाल जी ने  यह बात  कहीं ही नहीं बल्कि की है प्रमाणित भी किया है कि कबीर जी ही परमात्मा है आइए जानते हैं कुछ संतो की वाणियों में
 दादू दयाल जी कहते हैं
 जिन मो को निज नाम दिया ,सोई सतगुरु हमार !
दादू दूसरा कोई नहीं ,कबीर सिरजनहार !!

गरीब दास जी महाराज की वाणी में 
हम सुल्तानी नानक तारे दादू को उपदेश दिया !
 जात जुलाहा भेद न पाया काशी माही कबीर हुआ !!

 गुरु नानक देव जी की वाणी में 
हक्का कबीर करीम तू बेएब परवरदिगार !!
इनके अलावा भी अनेक संतों की वाणियां प्रमाणि

Posted by Trilok Dayma at 6:59 AM No comments:
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Labels: होली
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